भाग II:
एक समृद्ध विश्व के लिए नया प्रतिमान
एक नई चेतना विकसित हो रही है
जो पृथ्वी को एक एकल जीव के रूप में देखती है
और यह स्वीकार करती है कि स्वयं से युद्धरत जीव विनाश के लिए अभिशप्त है।
हम एक ही ग्रह हैं।अंतरिक्ष अन्वेषण के युग के महान रहस्योद्घाटनों में से एक है
पृथ्वी की वह छवि जो सीमित और अकेली है,
किसी रूप में असुरक्षित,
समूची मानव प्रजाति को धारण किए हुए
अंतरिक्ष और समय के महासागरों के पार ले जाती है।— कार्ल सेगन (1934–1996)